Sunday, 26 September 2021

--मेरे सात बाल उपन्यास --(कथासार)-

 

--मेरे सात बाल उपन्यास --(कथासार)-

                                ======

 

कुछ वर्ष  पहले मेरे सात बाल उपन्यासों का संकलन प्रकाशित हुआ था. पुस्तक का कलेवर बड़ा था.पाठकों की सुविधा के लिए मैं यहाँ सातों उपन्यासों का कथा सार   क्रमशः  प्रस्तुत कर रहा हूँ.

 

   ======

 

१.पेड़ नहीं कट रहे हैं २ चिड़िया और चिमनी ३ एक छोटी बांसुरी ४ खिलौने ५    नीलकान ६. अधूरा सिंहासन ७. हीरों के व्यापारी

 आप  इससे पहले 'पेड़ नहीं कट रहे हैं 'तथा  'चिड़िया और चिमनी' उपन्यासों के कथासार पढ़ चुके हैं। इस बार प्रस्तुत है 'एक छोटी बांसुरी' का कथासार-

3.       एक छोटी बांसुरी(हिंदी अकादेमी (दिल्ली )द्वारा पुरस्कृत

                 ==

 

नौ साल का अमर परेशान रहता है. उसके सैनिक पिता लड़ाई के मोर्चे से लापता हो गए हैं. अमर जानना चाहता है कि पिता कब आयेंगे. पर इसका जवाब उसकी मां कुसुम  के पास नहीं है. वह तो खुद ही परेशान है.अमर ने किताब में एक कहानी पढ़ी थी जिसमे एक लड़का  अपने खोए हुए भाई की खोज में  जाता है और उसे खोज कर ले आता है. अमर को लगता है कि उसे पिता की खोज में जाना चाहिए. लेकिन माँ को छोड़ कर कैसे जाए.

एक रात उसकी नींद टूट जाती है. वह घर से बाहर आ जाता है.सुनसान सड़क पर सैनिक मार्च करते जा रहे हैं. अमर सोचता है शायद इनमे से कोई सैनिक उसके पिता का पता बता दे,और वह भी उनके साथ साथ चलने लगता है.वह देर तक चलता जाता है. सैनिक जा चुके हैं. अमर भी थककर सड़क पर लेट कर सो जाता है.

एकाएक अमर की नींद टूटती है.सब तरफ जंगल है.वह घबरा जाता है.उसकी समझ में  कुछ नहीं आ रहा है. उसे अब माँ की याद आ रही है. वहां एक बूढा आता है.वह बांसुरी बजाकर भीख मांगता है.अमर उसे पिता के बारे में  बतलाता है.बूढा अमर से  कहता है कि वह उसके पिता को जानता है और अमर को उनके पास ले जा सकता है.भोला अमर ! उसे क्या पता कि बूढा उसे धोखा दे रहा है. वह उसके साथ चल देता है. वह पिता  से मिलने की  कल्पना में  खोया हुआ है.

 वे दोनों एक गाँव में  पहुंचते हैं.वहां एक औरत इन्हे खाना देती है.शाम ढल रही है. वह औरत कहती है-'जहाँ तुम बैठे हो वहां सांप निकलते  हैं.गाँव के बाहर एक मंदिर है,तुम वहां चले जाओ.' रात में  वही औरत इन दोनों के लिए खाना लेकर आती है. उसके साथ अमर की उम्र  का एक लड़का है.वह उसका पोता है  --गूंगा -बहरा. वह साथ लाई लालटेन ले जाती है.तभी एक चीख सुनाई देती है. पता चलता है,उसके पोते  रोहू को सांप ने  काट लिया है. गांव वाले रोहू को  शहर के अस्पताल ले जाते हैं,बूढा और अमर भी साथ हैं  बांसुरी बाबा ने इस बीच अमर को बांसुरी बजाना सिखा दिया है

.एक शाम मौसम खराब है.अमर बांसुरी- बाबा के साथ एक सराय  के बाहर खड़ा है.वे भूखे हैं और बारिश भी हो रही है.पर उन्हें कोई अन्दर नहीं जाने देता. तभी एक सेठ परिवार के साथ वहां आता है.सेठ सराय  में  चला जाता है.बांसुरी बाबा कुछ लोगों की बातें सुनता  है तो शोर मचा देता है.वे लोग सेठ को लूटने की बातें कर रहें हैं. वे लोग बांसुरी बाबा को घायल करके भाग जाते हैं. अब इन्हें अन्दर जगह मिलती है.बांसुरी बाबा को बहुत चोट लगी है. वह अमर से कहता है- मैंने तुझ से झूठ कहा था,मैं तेरे पिता को नहीं जानता.अमर बहुत घबरा जाता है  और बेहोश होकर गिर पड़ता है.बांसुरी बाबा की मौत हो जाती  है.

अमर बहुत बीमार है पर उसकी देखभाल करने वाला कोई नहीं. तभी डॉक्टर रायजादा वहां किसी को देखने आते हैं. उन्हें अमर के बारे में  पता चलता है.अमर को देखते ही डॉक्टर समझ जाते हैं कि अगर उसकी देखभाल नहीं हुई तो वह मर सकता है.रायजादा अमर को अपने घर ले जाते हैं.

 गाँव में  उनकी बहन की शादी है.वह अमर को अपने साथ ले जाते हैं.अमर दवा और  देख भाल से  ठीक हो रहा है.उन्हें अमर ने  सब बता  दिया  है.एक रात वह कहीं चले जाते हैं फिर अमर को अपने पास बुला  लेते हैं. अरे! यह तो रोहू का गाँव है. वहां रोहू मिलता है.फिर  अमर अपनी माँ को देखता है तो रोकर उनसे लिपट जाता है.यह सब डॉक्टर ने किया है. वह रोहू का इलाज कर रहे हैं.डॉक्टर अमर  से कहते हैं-- रोहू का इलाज शहर में ही हो सकता है .क्या तुम इसे अपने घर ले जाओगे? अमर झट रोहू का हाथ पकड़ लेता है. उसे पिता नहीं मिले , पर  कुछ ऐसा मिल गया है जिसे वह हमेशा अपने पास रखना चाहेगा ==

Monday, 6 September 2021

--मेरे सात बाल उपन्यास --(कथासार)-

 

--मेरे सात बाल उपन्यास --(कथासार)-

                                ======

 

कुछ वर्ष  पहले मेरे सात बाल उपन्यासों का संकलन प्रकाशित हुआ था. पुस्तक का कलेवर बड़ा था.पाठकों की सुविधा के लिए मैं यहाँ सातों उपन्यासों का कथा सार   क्रमशः  प्रस्तुत कर रहा हूँ.

 

   ======

 

१.पेड़ नहीं कट रहे हैं २ चिड़िया और चिमनी ३ एक छोटी बांसुरी ४ खिलौने ५ नीलकान ६. अधूरा सिंहासन ७. हीरों के व्यापारी

पिछली बार आपने =पेड़ नहीं काट रहे हैं =उपन्यास .की कहानी पढ़ी थी। इस बार प्रस्तुत है =='चिड़िया और चिमनी।

+++++++

 

 

2.       चिड़िया और चिमनी  (हिंदी अकादेमी / दिल्ली ) पुरस्कार

 

       ======    

;चिड़िया और चिमनी 'से जुड़ा हुआ एक व्यक्तिगत अनुभव साझा करना चाहता हूँ। मैंने २७ वर्ष बच्चों  की लोकप्रिय पत्रिका   'नंदन' के साथ बिताये थे(दुर्भाग्यवश  अब यह बंद हो चुकी है ). प्रति दिन घर से हिन्दुस्थान  टाइम्स जाते समय हमारी बस ito पुल  से गुजरती थी. पुल के एक  तरफ इंद्रप्रस्थ बिजलीघर है. उसकी ऊँची चिमनी से धुआं  निकलता रहता था. धुंए के बीच से कई बार परिंदों का झुण्ड उड़ता हुआ गुजरता था. यह दृश्य देखते हुए एक दिन मन में आया-अगर धुएँ के बीच से गुजरते हुए किसी चिड़िया का गला खराब हो जाये तो फिर क्या होगा?

बस इसी विचार ने 'चिड़िया और चिमनी' उपन्यास का रूप लिया.

              =====

 

 

 

 

 

कारखाने  की ऊँची चिमनी से लगातार काला विषैला धुआं निकलता रहता है. जंगल में  रहने वाली नीलम चिडिया काले धुएं के बादल के बीच से गुजरी तो उसका गला खराब हो गया, वह बीमार हो गई. पूरे जंगल में यह बात फैल गई.जंगल के राजा  हाथी दादा को नीलम बतलाती है कि चिमनी के धुऐं के कारण वह बीमार हो गई है. हाथी दादा को क्रोध आ जाता है. वह चिमनी को इस अपराध के लिए दंड देने का फैसला करते हैं. हाथी दादा जंगल के निकट बने कारखाने में जाकर अपने पैर की ठोकर से चिमनी को गिरा देते हैं.दोषी को दंड मिल गया. नीलम चिडिया खुश है. लेकिन तभी कुछ पक्षी कारखाने से लौट कर हाथी दादा को बतलाते हैं कि  उन्होंने चिमनी के रोने की आवाज़ सुनी है.वह कह रही है कि उसका क्या कसूर? वह तो दूसरे कामगारों की तरह नौकरी करती है. वह चाह कर भी धुऐं को निकलने से नहीं रोक सकती, क्योंकि उसके हाथ तो हैं नहीं जो अपना मुंह बंद कर सके. 

 

   हाथी दादा को लगता है यह तो गलत हो गया. तोड़फोड़ के कारण कारखाना बंद है. मजदूर बेकार हो गए हैं.उनके परिवार संकट में  हैं. हाथी दादा उनकी मदद की योजना बनाते हैं. लंगूरों के  झुण्ड रात के समय बस्ती में  फलों के ढेर लगा देते हैं.लेकिन बात नहीं बनती,फल रोटी का स्थान नहीं ले सकते.

 

 अब क्या हो? तभी कारखाने का मालिक  हरचरण अपने दोस्तों के साथ जंगल में  शिकार खेलने आ जाता है. जंगल में गोली चलने की आवाज़ गूंजने लगती है. जंगल के जीव नाराज़ हैं. वे शिकारियों को घेर लेते हैं. लंगूर शिकारियो की बंदूकें झील मैं फ़ेंक देते हैं. फिर हरियल तोते की मदद से शिकारियों और हाथी दादा के बीच बातचीत होती है. हरियल तोता मानवों की भाषा जानता है. पहले तो हरचरण अकड़ता है पर हाथी  दादा उसे चेतावनी देते हैं कि वे लोग जंगल  से बच  कर नहीं जा सकते . डरा हुआ हरचरण जंगल की हर शर्त मानने पर विवश है.

 

हाथी दादा कहते हैं- चिमनी की मरम्मत करवाओ, उसमें विषैले रसायन और कालिख को बाहर निकलने से  रोकने वाले उपकरण फिट करवाओ. बीमार मजदूर परिवारों के  इलाज का प्रबंध तुरंत हो.और सबसे बड़ी बात यह कि बंद कारखाना चालू हो ताकि मजदूरों को काम मिले.

 

हरचरण ऐसा ही करता है.इसके पीछे जंगली जानवरो के नए हमले का डर  भी जरूर रहा होगा. चिमनी अब फिर से सीधी खड़ी है और उसके अंदर से काला नहीं सफ़ेद धुआं निकल रहा है. कारखाना चल रहा है. नीलम चिडिया चिमनी के पास होकर आई है.दोनों सहेलियाँ बन गई हैं.  ==

Friday, 3 September 2021

--मेरे सात बाल उपन्यास --(कथासार)

 

--मेरे सात बाल उपन्यास --(कथासार)

                         =====

 

कुछ वर्ष  पहले मेरे सात बाल उपन्यासों का संकलन प्रकाशित हुआ था. पुस्तक का कलेवर बड़ा है इसलिए , मैं  पाठकों की सुविधा के लिए यहाँ सातों उपन्यासों का कथासार   क्रमशः प्रस्तुत कर रहा हूँ. प्रत्येक उपन्यास के कथासार को स्वतंत्र कहानी के  रूप  में भी पढ़ा जा सकता है.

 

                                           =बाल उपन्यास सूची =

                                                   ===

 

१.पेड़ नहीं कट रहे हैं २ चिड़िया और चिमनी ३ एक छोटी बांसुरी ४ खिलौने                                            . नीलकान ६. अधूरा सिंहासन ७. हीरों के व्यापारी|

 

 

 

1.              पेड़ नहीं कट रहे हैं (बाल उपन्यास) ==कथा सार

                             (बाल साहित्य का राष्ट्रीय पुरस्कार )

 

                                       ======

 

 

.    

 

जानू एक अनाथ  बालक  है. वह एक पेड़ के नीचे रहता है. रोटी के लिए बोझा ढोता है. सड़क चौड़ी करने के लिए पेड़ काट दिया जाता है. अब वह क्या करेगा,कहाँ जाएगा ?वह परेशान खड़ा है, तभी  पेड़ से एक घोंसला गिरता है. कुछ देर के लिए वह अपनी चिंता भूल जाता है .,फिर कुछ सोच कर घोंसले  को एक बंगले की चारदीवारी के छेद में टिका देता है.

 

बंगले में अजीत अपने अमीर पिता के साथ रहता है. अजीत जानू से कहता है- घोंसले को हमारे लॉन के पेड़ पर टिका दो. जानू की चिंता दूर हो जाती है. दोनों के बीच घोंसले की दोस्ती हो जाती है.  अजीत बढ़िया स्कूल मैं है, जानू  रोज उसे स्कूल जाते हुए देखता तो मन में आता है -क्या मैं भी कभी पढ़ सकूंगा।  

अजीत के कई दोस्त हैं  लेकिन जानू को वे ठीक नहीं लगते. कई तो अजीत से उम्र में बड़े लगते हैं. जानू ने उन्हें कई बार सिगरेट पीते हुए देखा है.  एक दिन जानू अजीत को कबाड़ी शेख की दूकान में  जाते हुए देखता है.जब अजीत बाहर आता है तो बस्ता उसकी पीठ पर नहीं है. जानू को लगता है वह बस्ता शेख की दूकान में भूल गया है. जानू शेख से अजीत का बस्ता लौटाने को कहता है पर शेख उसे बताता है कि जानू बस्ता बेच गया है.जानू को विश्वास नहीं होता.

 

शेख बीमार है, जानू उसकी मदद करता है, दवाई देता है. दोनों एकदूसरे को अपनी जीवन कथा सुनाते हैं. दोनों ही दुनिया में अकेले हैं. उनमें निकटता हो  जाती है. शेख बस्ता जानू को लौटा देता है. जानू अजीत को उसका बस्ता वापस देता है  तो वह जानू से नाराज़ हो जाता है. उसे लगता है जानू उसकी जासूसी कर रहा है, जबकि जानू तो बस इतना चाहता है कि अजीत अपने नकली दोस्तों से दूर रह कर ठीक से पढ़े  लेकिन अजीत उसकी कोई बात सुनने को तैयार नहीं.

कुछ दिन बाद एक शाम जानू अजीत को अपने दोस्त के साथ रेलवे स्टेशन पर देखता है. आखिर अजीत इस समय वहां कर क्या रहा है? जानू अजीत के साथी को एक दाढ़ीवाले से बातें करते हुए सुनता है, इसके बाद अजीत का दोस्त उसे जैसे जबरदस्ती ले जाता है. जानू ने सुना है वे काली कोठी जा रहे हैं.  वह सुनसान जगह में  एक खंडहर इमारत है. जानू समझ गया है कि अजीत किसी साजिश का शिकार होने जा रहा है.  वह भी उन दोनों के पीछे चल देता है,

 

काली कोठी में अँधेरा है.बदमाशों ने अजीत का अपहरण कर लिया है. दाढ़ीवाला उनका लीडर है. वह अपने साथी के हाथों फिरोती का पत्र अजीत के पिता के पास भेजता है, अजीत  बदमाशों  की कैद में है. जानू चुपचाप अंदर घुस जाता है,अजीत एक कमरे में  बंधन में  है. जानू उसके बंधन खोलता है तो  अजीत का नकली दोस्त बदमाशों को सावधान कर देता है.जानू अजीत का हाथ थाम कर भागता है. अब तक अजीत भी सच जान गया है. बदमाश इन दोनों के पीछे भागते हैं पर तभी पुलिस आ जाती है. बदमाश पकड़ लिए जातें हैं. असल में  जब अजीत के पिता फिरौती की रकम लेकर जा रहे थे तभी पुलिस मिल जाती है और उनके साथ  वहां आ जाती है. अजीत की आँखें खुल गई हैं, वह सबके सामने जानू को   अपना असली दोस्त मान लेता है. जानू को लगता है कि अभी बहुत सारे पेड़ हैं आसरे के लिए. (समाप्त )

Monday, 30 August 2021

चिड़िया लाटरी- कहानी -देवेंद्र कुमार

 

  चिड़िया लाटरी- कहानी -देवेंद्र कुमार

                                                                                    ======

एक सुबह बाबा  की नींद खुली तो खिड़की के शीशों पर  बारिश की बूंदों की आवाज़ सुनाई दी। घर में सब सो रहे थे।  बाबा ने दरवाज़ा खोला और गैलरी में निकल आये। मुंह पर गीली हवा का झोंका लगा। तभी कान में तोते की  टें टें की   आवाज़ आई।बाबा सोचने लगे -बारिश में इतनी सुबह तोता कहाँ से आया! वह कुछ और सोचते कि नीचे गार्ड रूम की गुमटी में गेटमैन रामजी दिखाई दिया, उसके हाथ में एक पिंजरा था। तोते की आवाज़ उसी में से आ रही थी।बाबा ने  छाता लिया और रामजी के पास जा पहुंचे।

 

पता चला दूध वाला जयराम तोते का पिंजरा लाया है। तभी जयराम दूध देकर आ गया। उसने बताया--जब मैं पास की गली से आ रहा था तभी तोते का पिँजरा दिखाई दिया, पिंजरा एक मकान के बाहर छज्जे लटका हुआ था। बारिश में भीगने के कारण तोता चीख रहा था। मैंने मकान का  दरवाज़ा खटखटाया पर कोई जवाब नहीं मिला।तभी किसी ने कहा कि मकान बंद है। सब लोग बाहर गए हैं। इस बीच तोता लगातार चीख रहा था। मैंने पिंजरा कुंडे से निकाला और यहां  ले आया।।'

 

कैसे निर्दयी होते हैं लोग जो अपने पालतू जीवों की जरा भी परवाह नहीं करते।'रामजी ने कहा तो बाबा बोले -'पक्षी  कभी पालतू  नहीं होते, यह बेचारा तो पिंजरे का कैदी है।''तो इसे मैं पाल लूँगा।'जयराम ने कहा तो बाबा बोले -'कभी नहीं, इसके पंख सूखने के बाद हम इसे खुले आकाश में उडा  देंगे|’

 

जल्दी ही पूरी सोसाइटी के बच्चे तोते के बारे में जान गये  और रामजी की गुमटी के बाहर जमा हो  गए। हर बच्चा तोते को छू कर देखना चाहता था। बाबा ने मना  कर दिया। और बता दिया कि वह तोते के पंख  सूखने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

 

बारिश रुक गई फिर धूप निकल आयी।तोता अब शांत था। उसके गीले पंख भी सूख गए थे। रामजी तोते  का पिंजरा लेकर एक फ़्लैट की छत पर चला गया, साथ में बाबा और बच्चों की टोली भी थी।हर बच्चा तोते को छू कर  देखना चाहता  था। पिंजरे को एक मेज़ पर टिका दिया गया,तभी रामजी ने बाबा को बच्चों की इच्छा  बताई तो बाबा ने कहा-'हर बच्चा बारी बारी से पिंजरे को छू सकता है  लेकिन एक शर्त है।

                                                                      

हर बच्चे को एक प्रण लेना होगा। बाबा से अनुमति  पाकर हर बच्चे ने पिंजरे  को छू कर कहा-'मैं कभी किसी पक्षी को पिंजरे में कैद नहीं करूंगा।इसके बाद जयराम ने पिंजरे का दरवाज़ा खोल दिया ।तोता तुरंत उड़ गया, कुछ पल नीले आकाश में तोता एक नन्हे हरे बिंदु की तरह दिखाई दिया और फिर आँखों से ओझल हो गया।

 

                                                             1

'इसके बाद सब नीचे उतरने लगे तभी बाबा ठिठक गए-बोले-सबसे जरूरी काम तो रह ही गया ' सब बच्चे उनकी ओर अचरज के भाव से देखने लगे। आखिर बाबा किस जरूरी काम की बात कर रहे थे! बाबा ने पिजरा हाथ में लेकर दबाया तो पिंजरे के तार  टेढ़े हो गए उन्होंने कहा-;अगर यह पिंजरा हम यहीं छोड़ देते तो फिर कोई आज़ाद परिंदा इसमें कैद हो सकता था,' पिंजरे के तार टेढ़े हो गए थे,उसका दरवाज़ा टूट कर गिर गया था। बाबा ने पिंजरा जयराम के हाथ में थमा कर कहा-'इसे दूर फेंक दो। '

 

जयराम ने उछाल कर पिंजरे को फेंक दिया। पर यह क्या !पिंजरा जमीन पर नहीं गिरा बल्कि जाकर एक पेड़ की डाली से लटक गया। तुरंत एक चिड़िया टूटे हुए पिंजरे में गई और फिर झट उड़ गई,इसके बाद और भी कई चिड़ियों ने वैसा ही किया। देख कर बच्चे ताली बजाने लगे। बाबा ने हंस कर कहा-'लगता है अभी इस पिंजरे की कहानी ख़त्म नहीं हुई।'

 

'कहानी !'रामजी के स्वर में अचरज बोल रहा था।'

 

हाँ ,देखो न अब चिड़िया इसमें आ जा रही है,'जैसे उनका नया घर हो।'

 

जयराम ने कहा-मैं पेड़ पर चढ़ कर पिंजरे की फेंक दूंगा।'

 

बाबा ने कुछ सोचते हुए कहा-'नहीं यह सब करने की जरूरत नहीं, क्यों न इस टूटे हुए पिंजरे को चिड़ियों का मेहमान घर बना दिया जाए। 'वह कैसे ?' एक बच्चे ने पूछा|

 

'रामजी,  तुम हर सुबह ड्यूटी पर आने के बाद मेहमान चिड़ियों के दाने और पानी का इंतजाम करोगे।।'

 

बस मैं समझ गया।'रामजी ने कहा और दो छोटी कटोरियाँ ले आया।वह पेड़ पर चढ़ गया और जयराम ने पानी और दाना पकड़ा दिया रामजी ने सावधानी से  एक कटोरी में पानी और दूसरी में दाने रख दिए। बच्चे चिल्ला उठे-'तैयार हो गया चिड़ियों का मेहमान घर।'फिर उन्होंने एक साथ कहा-'हम भी चिड़ियों के मेहमान घर में दाना और पानी रखना चाहते हैं।'

 

                                                                                  2

'जो बच्चा पेड़ पर चढ़ना जानता हो वह अपना हाथ उठाये।'बाबा ने कहा तो बच्चे चुप खड़े रहे रामजी ने कहा-;ये ठहरे शहर में रहने वाले बच्चे ,इन्हें दुनिया भर की खबर  है पर पेड़ पौधों के बारे में नहीं जानते। मैं तो गाँव से आया हूँ वहां लोग पेड़ पौधों के बीच रहते हैं। 'रामजी यह कह रहा था और बच्चे चुप और उदास खड़े थे। तभी राम जी  ने कहा -बच्चो,उदास मत हो। आज के बच्चे इतना कुछ जानते हैं हम जिसकी कल्पना भी नहीं कर सकते| 'उसने बाबा से कुछ कहा और वहां से चला गया।

 

 कुछ देर बाद रामजी आया तो उसके साथ दो जने और थे। वे बिजली घर की गाडी धकेलते हुए ला रहे थे। उन्होंने गाडी को पेड़ से सटा  कर लगा दिया। फिर कहा-रामजी हमारा दोस्त है। इसने बच्चों की इच्छा बताई तो हमें उपाय सूझ गया। 'अरे सचमुच, गाडी के मचान पर खड़े होकर  कोई बच्चा भी डाली से लटकते पिंजरे को छू सकता था।

बिजलीघर का सब स्टेशन पास में था। उस गाडी के मचान पर खड़े होकर कर्मचारी तारों की मरम्मत और खम्भों के बल्ब   बदलने का काम किया करते थे। अपनी समस्या का समाधान जानकार बच्चे खुश हो गए। सब एक साथ कहने लगे-पहले मैं पहले'मैं….’

बाबा ने कहा –‘ ।सब बच्चे तो एक साथ मचान पर खड़े नहीं हो सकते| इसका एक तरीका है।

और सोसाइटी के पार्क में चले आये। बच्चा टोली पीछे पीछे थी। बाबा ने हर बब्च्चे के नाम की पर्चियां बनाई, फिर एक बच्चे से एक पर्ची उठाने को कहा,  अनुज की पर्ची निकली तो वह ख़ुशी से उछल  पड़ा।  बाबा बच्चा टोली के साथ बाहर आये तो बिजली घर की गाडी को देख कर चौंक पड़े,इस बीच गाडी को धो पोंछ कर उसका हुलिया ही बदल दिया गया था। उस पर एक फूल माला लटक रही थी

 

बाबा ने हंस कर कहा- यह फूल माला क्यों,क्या हम पूजा करने जा रहे हैं!

 

बिजली घर के कर्नचारी ने कहा-'साहब ,पूजा ही तो है।आज तो इस गाडी का शुभ दिन है। हम तो सोच भी नहीं सकते थे कि कभी  बच्चे इस पर खड़े होकर चिड़ियों से बात करेंगे। '

 

अनुज ने मचान  पर खड़े होकर चिड़ियों के मेहमान घर की कटोरियों में दाना और पानी रख दिया बच्चे बहुत खुश थे। बाबा ने इसे नाम दिया है -चिड़िया लाटरी। देखे मेरी पर्ची कब निकलती है। (समाप्त )।